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Ai कंटेंट पर सरकार की सख्ती

रिपोट राजकुमार मौर्या बहराइच 

AI-generated कंटेंट पर लेबलिंग अनिवार्य:
प्लेटफॉर्म्स को सुनिश्चित करना होगा कि AI से बने फोटो, वीडियो या ऑडियो पर स्पष्ट और प्रमुख लेबल (जैसे "AI-generated" या "Synthetically generated") लगा हो। यह लेबल आसानी से दिखाई देना चाहिए, और यूजर्स इसे हटा या छिपा नहीं सकेंगे। ऑडियो में शुरुआत में स्पष्ट डिस्क्लोजर होना चाहिए।
3 घंटे में हटाना:
भ्रामक, गैरकानूनी या हानिकारक AI कंटेंट (जैसे deepfakes) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को 3 घंटे (कुछ मामलों में 2 घंटे) के अंदर हटाना होगा, अगर यह सरकार, कोर्ट या सक्षम अथॉरिटी द्वारा फ्लैग किया जाए। सामान्य कंटेंट के लिए भी टेकडाउन टाइमलाइन को तेज किया गया है।
बच्चों, निजी तस्वीरों और हिंसा से जुड़े कंटेंट पर सख्ती:
बच्चों से संबंधित, नॉन-कंसेंशुअल (बिना सहमति) इंटीमेट इमेज/वीडियो, या हिंसा/इम्पर्सोनेशन वाले AI कंटेंट पर विशेष ध्यान। ऐसे कंटेंट को रोकने के लिए प्लेटफॉर्म्स को ऑटोमेटेड टूल्स और अन्य तकनीकी उपाय अपनाने होंगे।
Significant Social Media Intermediaries (SSMIs) (जिनके 50 लाख से ज्यादा यूजर्स हैं) के लिए अतिरिक्त नियम:
यूजर्स से AI कंटेंट पोस्ट करने से पहले डिक्लेरेशन लेना और टेक्निकल वेरिफिकेशन करना।
नियम न मानने पर कार्रवाई:
अगर प्लेटफॉर्म्स (जैसे Meta, YouTube, X, Instagram आदि) इन नियमों का पालन नहीं करते, तो वे safe harbour protection खो सकते हैं और कानूनी कार्रवाई (जुर्माना, मुकदमा) का सामना कर सकते हैं।

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